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किसानों को बड़ी सौगात! टोकन का झंझट होगा कम; सरकार ने बदले नियम छत्तीसगढ़/किसानों को बड़ी सौगात!

Chhattisgarh 24 news Dharmendra Kumar Pandey sipat Bilaspur छत्तीसगढ़ किसानों को बड़ी सौगात! टोकन का झंझट होगा कम; सरकार ने बदले नियम 360 नए केंद्र रायपुर : छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों के लिए धान खरीदी को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने का निर्णय लिया है। इस बार किसानों को धान बेचने में होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। सरकार प्रदेशभर में 360 नए धान खरीदी केंद्र खोलने जा रही है। इसके साथ ही राज्य में उपार्जन केंद्रों की कुल संख्या बढ़कर 3,100 हो जाएगी। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि किसानों को धान बेचने के लिए लंबी कतारों और टोकन संबंधी परेशानियों से राहत दिलाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार इस वर्ष भी किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदेगी। इस फैसले से प्रदेश के 27 लाख 50 हजार से अधिक किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। छत्तीसगढ़ राज्य 15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी छत्तीसगढ़ सरकार ने धान खरीदी की तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में 15 नवंबर 2026 से धान खरीदी प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया।कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि धान खरीदी की तैयारी शुरू कर दी गई है। उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार की कोशिश है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के दौरान अनावश्यक परेशानी न हो और खरीदी की प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से पूरी की जा सके। Also Read – मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर सियासी घमासान! संगठन से सत्ता तक इन चेहरों की चर्चा 360 नए धान खरीदी केंद्र खुलेंगे कृषि मंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि पिछले वर्षों में किसानों को धान बेचने के दौरान लंबी कतारों और टोकन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष 360 नए धान उपार्जन केंद्र शुरू करने का निर्णय लिया गया है। नए केंद्रों के खुलने से प्रदेश में कुल धान खरीदी केंद्रों की संख्या 3,100 हो जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को अपने नजदीकी केंद्र पर धान बेचने की सुविधा उपलब्ध कराना है। इससे खरीदी केंद्रों पर भीड़ का दबाव कम होने और किसानों का समय बचने की उम्मीद है। Also Read – छत्तीसगढ़ में नेताओं की सुरक्षा पर ₹150 करोड़ खर्च! 1550 जवान और 500 गाड़ियां तैनात, अब 116 नेताओं की सुरक्षा की समीक्षा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा धान छत्तीसगढ़ सरकार ने इस वर्ष भी किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी का फैसला किया है। किसानों से प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान खरीदा जाएगा। इस सीमा के आधार पर पात्र किसान एक एकड़ में निर्धारित अधिकतम मात्रा बेचने पर 65,100 रुपये की कुल धान कीमत प्राप्त कर सकता है। हालांकि, किसानों को मिलने वाली वास्तविक राशि उनके पात्र रकबे, धान की बेची गई मात्रा और लागू सरकारी नियमों पर निर्भर करेगी। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आय और कृषि क्षेत्र से जुड़े हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले ले रही है। ; शासन ने जारी किया आदेश पुराने पंजीकृत किसानों को दोबारा रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं धान खरीदी की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए राज्य सरकार ने किसानों के पंजीयन से संबंधित महत्वपूर्ण फैसला लिया है। पिछले वर्ष पंजीकृत ऐसे किसान, जिनके पास एग्रीस्टेक आईडी है, उन्हें इस बार धान विक्रय के लिए नए सिरे से पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। इस व्यवस्था से बड़ी संख्या में किसानों को दोबारा दस्तावेज जमा करने और पंजीयन संबंधी प्रक्रिया पूरी करने से राहत मिलेगी। कृषि मंत्री ने बताया कि एग्रीस्टेक के माध्यम से किसानों की जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध होने से धान खरीदी की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकेगा। अब ऋण पुस्तिका लेकर समिति जाने की आवश्यकता नहीं कृषि मंत्री रामविचार नेताम के अनुसार, एग्रीस्टेक में पंजीकृत किसानों को धान बेचने के लिए अलग से ऋण पुस्तिका लेकर समिति पहुंचने की आवश्यकता नहीं होगी। डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से धान के रकबे का ऑनलाइन निर्धारण किया गया है। इससे किसानों के पंजीयन और भूमि से संबंधित जानकारी की जांच डिजिटल तरीके से की जा सकेगी। हालांकि, किसानों को धान विक्रय से पहले अपने पंजीयन और पात्रता संबंधी विवरण की जांच कर लेनी चाहिए, ताकि खरीदी केंद्र पर किसी तरह की परेशानी न हो। फर्जीवाड़े पर रोक लगाने की तैयारी सरकार ने वास्तविक किसानों से धान खरीदी सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक आधारित व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस प्रणाली के माध्यम से धान बेचने वाले किसानों की पहचान सत्यापित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य धान खरीदी में पारदर्शिता लाना और अपात्र व्यक्तियों के माध्यम से होने वाली अनियमितताओं को रोकना है। डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टेक और बायोमेट्रिक पहचान को जोड़कर खरीदी प्रक्रिया को बेहतर बनाने की तैयारी की गई है। ‘तुंहर टोकन’ ऐप से मिलेगी ऑनलाइन टोकन की सुविधा इस बार किसानों की सुविधा के लिए ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल ऐप का भी उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से पात्र किसान ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर सकेंगे। ऑनलाइन टोकन व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को टोकन प्राप्त करने के लिए बार-बार खरीदी केंद्रों और समितियों के चक्कर लगाने से राहत दिलाना है। किसान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपनी उपज बेचने की तारीख से संबंधित व्यवस्था का लाभ उठा सकेंगे। सरकार ने यह भी व्यवस्था की है कि यदि कोई किसान एक टोकन में अपनी पूरी पात्र मात्रा का धान नहीं बेच पाता है, तो शेष पात्र मात्रा अगले टोकन में शामिल की जा सकेगी। 27.50 लाख से अधिक किसानों से धान खरीदी की तैयारी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने 27 लाख 50 हजार से अधिक किसानों से धान खरीदी करने की तैयारी की है। इतनी बड़ी संख्या में किसानों की उपज खरीदने के लिए प्रदेशभर में उपार्जन केंद्रों पर व्यवस्थाएं मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने अवैध धान की आवक रोकने के लिए सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और चेक पोस्ट की व्यवस्था करने का भी निर्णय लिया है। धान परिवहन में जीपीएस ट्रैकिंग और संबंधित प्रक्रियाओं में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। किसानों के लिए जरूरी निर्देश धान बेचने वाले किसानों को अपना एग्रीस्टेक पंजीयन और पात्र रकबा जांचना चाहिए। जिन किसानों को नए पंजीयन या जानकारी में संशोधन की आवश्यकता है, वे संबंधित समिति से प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा किसानों को टोकन जारी होने की व्यवस्था, धान की गुणवत्ता, निर्धारित खरीदी सीमा और बायोमेट्रिक सत्यापन संबंधी नियमों का पालन करना होगा। सरकार ने समितियों को खरीदी के दौरान किसानों के लिए समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी के लिए राज्य सरकार ने 3,100 उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था की है। 360 नए केंद्र, ऑनलाइन टोकन, एग्रीस्टेक पंजीयन और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी सुविधाओं से इस बेचने की प्रक्रिया पहले से अधिक सुगम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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