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बिलासपुर में भक्ति और श्रद्धा का महासंगम 9 से 11 जनवरी तक जया किशोरी की नानी बाई का मायरा कथा मिनोचा कॉलोनी में ऐतिहासिक का आयोजन

छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़ धर्मेंद्र पांडेय बिलासपुर शहर एक बार फिर भक्ति,आस्था और भारतीय सनातन संस्कृति के रंग में रंगने जा रहा है विश्व विख्यात आध्यात्मिक कथावाचक एवं युवाओं में विशेष लोकप्रियता vरखने वाली सुश्री जया किशोरी के मुखारविंद से “नानी बाई का मायरा” कथा एवं भजन का भव्य आयोजन 9 जनवरी से 11 जनवरी तक मिनोचा कॉलोनी गार्डन में किया जा रहा है। यह आयोजन श्री प्रेम सेवा परिवार के तत्वावधान में हो रहा है,जिसे लेकर पूरे शहर में खासा उत्साह और उल्लास देखा जा रहा है। तीन दिवसीय इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आयोजन समिति द्वारा जानकारी दी गई कि कथा स्थल पर 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के बैठने हेतु विशाल, सुव्यवस्थित और सुरक्षित पंडाल का निर्माण किया जा रहा है। प्रतिदिन दोपहर 3:00 बजे से कथा एवं भजन का शुभारंभ होगा, जिसमें शहर सहित आसपास के जिलों से भी श्रद्धालुओं के बड़ी संख्या में पहुंचने की संभावना है।

 

*पहली बार बिलासपुर में जया किशोरी की मायरा कथा*

आयोजन समिति ने बताया कि जया किशोरी द्वारा प्रस्तुत “नानी बाई का मायरा” कथा का यह बिलासपुर में पहला आयोजन है। जया किशोरी अपनी सरल भाषा,भावपूर्ण भजनों और प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से धर्म, भक्ति और मानवीय मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए देश-विदेश में जानी जाती हैं। उनकी कथाओं में युवाओं,महिलाओं और बुजुर्गों सभी के लिए विशेष संदेश छिपा होता है,जिससे श्रोता भावविभोर हो जाते हैं।

*मायरा परंपरा का आध्यात्मिक महत्व*

पत्रकारवार्ता के दौरान प्रेम सेवा परिवार के पदाधिकारियों राजेश गोयल, सुनील सुल्तानिया,विमल अग्रवाल, बजरंग अग्रवाल, बंटी सोथालिया एवं मनीष अग्रवाल ने बताया कि मायरा (भात) भारतीय संस्कृति की एक पवित्र परंपरा है, जो विवाह के समय मायके पक्ष द्वारा निभाई जाती है। यह परंपरा विशेष रूप से महिलाओं में अधिक प्रचलित रही है और सामाजिक रिश्तों की मजबूती का प्रतीक मानी जाती है।

विमल अग्रवाल ने कथा की ऐतिहासिक और धार्मिक पृष्ठभूमि को विस्तार से बताते हुए कहा कि भक्त कवि नरसिंह मेहता की पुत्री नानी बाई ने अपना सर्वस्व भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित कर दिया था। जब उनकी पुत्री सुलोचना के विवाह के अवसर पर मायरा भरने का समय आया, तब नानी बाई के पास धन-संपत्ति के नाम पर कुछ भी नहीं था, केवल भक्ति और हाथों में मंजीरा था। ऐसे समय में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण मायरा भरने के लिए प्रकट हुए और जूनागढ़ में आठ पहर तक दान वितरण कर भक्त की लाज रखी। इसी मार्मिक और प्रेरणादायक कथा को जया किशोरी जी अपने भावपूर्ण शब्दों और भजनों के माध्यम से प्रस्तुत करती हैं।

व्यवस्था,सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष ध्यान आयोजन समिति ने बताया कि इस विशाल कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन,पुलिस प्रशासन एवं नगर निगम बिलासपुर का पूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कथा स्थल तक पहुंचने हेतु निःशुल्क ई-रिक्शा सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। पंडाल में प्रवेश के लिए चार मुख्य द्वार बनाए गए हैं, जिनमें गेट नंबर 4 अति विशिष्ट अतिथियों के लिए आरक्षित रहेगा। उल्लेखनीय है कि इस आयोजन में किसी भी प्रकार का पास सिस्टम नहीं रखा गया है, जिससे सभी श्रद्धालु सहजता से कथा का लाभ ले सकें।
पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात और पार्किंग की समुचित व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा श्री प्रेम सेवा परिवार के सैकड़ों कार्यकर्ता पूरे आयोजन के दौरान मौजूद रहेंगे, जो बैठने की व्यवस्था, अनुशासन और श्रद्धालुओं की सहायता सुनिश्चित करेंगे।

*सीधा प्रसारण और व्यापक सहभागिता*

जो श्रद्धालु किसी कारणवश कथा स्थल पर उपस्थित नहीं हो पाएंगे, उनके लिए मायरा कथा एवं भजनों का सीधा प्रसारण भी किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस आध्यात्मिक आयोजन से जुड़ सकें। आयोजन समिति का मानना है कि यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा,बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूती प्रदान करेगा।

*पत्रकारवार्ता में रहे उपस्थित*

इस अवसर पर आयोजित पत्रकारवार्ता में श्री प्रेम सेवा परिवार के सदस्य राजेश अग्रवाल, चक्कू, सुनील सुल्तानिया, विमल अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, बसंत अग्रवाल, बजरंग अग्रवाल, शुभम अग्रवाल, बंटी सोथालिया सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आयोजन समिति ने शहरवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर जया किशोरी की “नानी बाई का मायरा” कथा का श्रवण करें और इस आध्यात्मिक उत्सव को सफल बनाएं।

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